तेरी साँसों की गर्मी जब तकरीर बन जाती है मेरी गर्दन पर तेरे होंठों की वो निशानी सज जाती है
कपड़े तो उतर ही जाएँगे एक वक्त
पहले तू अपनी नज़रों से मुझे नंगा कर दे ज़रा

सारी रात की नींद मेरे हाथों में पिघल जाती है
होंठों से नहीं, आँखों से बात कर
देख कितनी जल्दी सारी हदें सरक जाती हैं
चादर ओढ़कर भी ठंड लग रही है आज
आ जा… तेरे जिस्म की आग में थोड़ा जलने दे मुझे