Gandi soch gandi shayari hindi

Gandi soch gandi shayari

तेरी साँसों की गर्मी जब तकरीर बन जाती है मेरी गर्दन पर तेरे होंठों की वो निशानी सज जाती है

कपड़े तो उतर ही जाएँगे एक वक्त

पहले तू अपनी नज़रों से मुझे नंगा कर दे ज़रा

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gandi shayari in hindi

सारी रात की नींद मेरे हाथों में पिघल जाती है

होंठों से नहीं, आँखों से बात कर

देख कितनी जल्दी सारी हदें सरक जाती हैं

चादर ओढ़कर भी ठंड लग रही है आज

आ जा… तेरे जिस्म की आग में थोड़ा जलने दे मुझे