छात्रों की आड़ में छिपे आपराधिक तत्वों पर कार्रवाई जारी रहेगी, CJI ने कहा- पुलिस की ज्यादती हुई होगी तो उस पर भी होगी जांच।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि छात्र होने के नाम पर गंभीर अपराध करने वालों को संरक्षण मिलेगा।
NEET प्रोटेस्ट के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद छात्रों पर दर्ज एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट कहा कि छात्रों की आड़ में गंभीर अपराध करने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि पहले यह स्पष्ट करना होगा कि कुल कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं और उनमें से कितने मामलों में ऐसे लोग शामिल हैं जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार छात्रों पर अनावश्यक कार्रवाई नहीं चाहती और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ आपराधिक तत्व छात्रों के बीच शामिल हो गए थे और ऐसे लोगों को किसी भी तरह की कानूनी राहत नहीं मिलनी चाहिए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह भी तय करना होगा कि किन मामलों को बंद किया जा सकता है और इसके लिए क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा कार्रवाई के दौरान अधिकारों का दुरुपयोग या ज्यादती की गई है तो ऐसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच होगी।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि छात्र होने के नाम पर गंभीर अपराध करने वालों को संरक्षण मिलेगा। वहीं दूसरी ओर, यदि पुलिस ने कहीं अनुचित कार्रवाई की है तो कानून उसके खिलाफ भी समान रूप से लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की है। उस दिन प्रस्तावित समिति के गठन, उसके कार्यक्षेत्र (Terms of Reference) और जांच प्रक्रिया (प्रोटोकॉल) पर भी विचार किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
एंकर: राष्ट्रीय समाचार